क़ामयाबी
पुकारा ज़माने ने नाम तुम्हारा,क़ामयाब हो सबने जाना।
पड़े कदम चहुँ ओर तुम्हारे,
क़ामयाबी पे सब वारे वारे।
अनसुनी आवाज़ वो ,
केवल मन की आस हो।
ढूंढते जो कदम तुम्हारे,
अन्चली वो बाट हो।
चला चल मनुआ
ज़रा थम के थोड़ा ,
क़ामयाबी तो
बातों का रोड़ा।
7 Feb 2016