मकर संक्रांत
आज उड़ाओ दिल पतंग,
बेहद ऊँची, खुली स्वछंद।
सूर्य किरणों में लिपट ,
इन बहारों को सिमट।
हो उड़ान अलबेली अनंत ,
विशालदर्शी मुक्तानंद।
आज उड़ाओ दिल पतंग,
बेहद ऊँची, खुली स्वछंद।
सूर्य किरणों में लिपट ,
इन बहारों को सिमट।
हो उड़ान अलबेली अनंत ,
विशालदर्शी मुक्तानंद।
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