Tuesday, 10 November 2015

November 11 2015
राज़ 


हवा में है  राज़, जीवन का,
जी भर के जी ले , जीवन मना । 

हवा में है नगमा, सुन  ज़रा, 
दे दो सुर तो,  सरगम यहाँ। 
कण कण  की कम्पन कहती, हाँ 
सब कुछ अभी, सब कुछ यहाँ। 
हवा में है राज़, जीवन का,
जी भर के जी ले , जीवन मना ।

हवा में  पैगाम लिखा हुआ,
जो पढ़ सको तो, दुरी कहाँ। 
अमन सुनाय , सदियों की बाणी, 
गूंजे मन में, बन अंतर्वाणी  ।  
हवा में है राज़, जीवन का,
जी भर के जी ले , जीवन मना ।

घूमें  हवा में सपनें  सभी,
ज़मीं पे तराशो तुम हीं अभी। 
संग हवा के चलते चलो,
न सीमा, न साथी, बहते रहो। 
हवा में है राज़, जीवन का,
जी भर के जी ले , जीवन मना 

   

No comments:

Post a Comment